इंदौर. कोरोनावायरस का इंदौर में तेजी से संक्रमण फैलने से शहर अब स्टेज-3 में आ चुका है। यानी वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा है। इसी वजह से इंदौर में 1 अप्रैल तक देश का सबसे सख्त लॉकडाउन लागू किया गया है। मंगलवार को दूसरे दिन भी पेट्रोल पंप, किराना दुकानें, सब्जी-मंडियां पूरी तरह बंद रहीं। दूध के लिए लोगों परेशान होते देखे गए। जिसे दूध मिला, उसने खपत से ज्यादा स्टॉक कर लिया। पूछने पर कहा- रिस्क नहीं ले सकते, क्या पता, कल क्या हो। वहीं, बेवजह चौराहों पर घूमने वालों की गाड़ियों की पुलिस ने हवा निकालकर सजा दी। लॉकडाउन में होम डिलीवरी भी बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। शहर में पुलिस, प्रशासन, हेल्थ वर्कर्स, मेडिकल स्टोर्स और मीडिया को छोड़कर किसी को भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। इंदौर के लिए राहत की बात यह है कि मनोरमा राजे अस्पताल में भर्ती 24 पॉजिटिव में से 18 मरीजों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
ज्यादा दूध लेने की लोगों ने बताई वजह
देवास नाका क्षेत्र में रहने वाले अशोक सिंह के हाथ में सांची दूध के पांच से छह पैकेट नजर आई। इतना दूध देखकर पूछा तो उन्होंने जवाब दिया- आपने कल नहीं देखा ना, क्या हुआ था। रात में पता नहीं था कि दूध नहीं आएगा, इसलिए लिया नहीं। सुबह दूध खोजते-खोजते दिन निकल गया। रात में भी भीड़ के कारण नहीं मिल पाया। अब रिस्क नहीं ले सकता। इसलिए 2 दिन का दूध एक साथ ही ले लिया। पता नहीं कल कौन सा आदेश आ जाए। ऐसे समय में थोड़ा स्टॉक रखना ही सही है। अशोक के साथ उनके अन्य साथियों के हाथ में भी दूध के तीन से चार पैकेट नजर आए।
शाम को भीड़ बढ़ने के बाद आदेश बदला
सोमवार को लोगों को दिनभर दूध के लिए परेशान होता देख प्रशासन ने थोड़ी राहत दी। सुबह 6 से 9 बजे और शाम से 5 से 7 बजे तक दुकानों से दूध मिलेगा। इसके बाद सोमवार शाम को 5 बजे दूध के लिए आपाधापी मच गई। डेयरियों पर भीड़ जमा हो गई। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ भूल गए। हालात को देखते हुए प्रशासन मंगलवार को किसी भी व्यक्ति के बाहर निकलने पर रोक लगा दी। प्रतिबंधात्मक आदेश में कहा गया है कि अब सुबह 8 से 10 के बीच दूध का वितरण होगा, इस काम में लगे लोगों को रोका नहीं जाएगा। वितरकों द्वारा घर पर ही दूध पहुंचाया जाएगा। हालांकि, दुग्ध विक्रेता संघ के भरत मथुरावाला का कहना है कि शहर में कई लोग दुकानों पर आकर दूध लेते हैं, ऐसे में उन्हें घर पर दूध पहुंचाने के लिए हमारे पास अतिरिक्त संसाधन नहीं हैं।
30% आबादी दूध के लिए परेशान
प्रशासन द्वारा घर तक दूध पहुंचाने के आदेश के बाद मंगलवार को शहर की करीब 30% आबादी परेशान नजर आई। इनमें वे लोग थे, जो डेयरी जाकर दूध लाते हैं। मल्हारगंज के रहने वाले श्याम राव का कहना था कि उनके घर पर दूध वाला नहीं आता। हमारे क्षेत्र की डेयरी में दूध सही नहीं मिलता, इसलिए दूसरे क्षेत्र की डेयरी से दूध लाता हूं। उन्हें नहीं पता कि मेरा घर कहां है, ऐसे में वे मेरे घर तक दूध नहीं पहुंचा पाए। सुबह रास्ते से गुजर रहे दूधवालों को हाथ देकर रोका, बमुश्किल एक ने दूध दिया। यही हाल शहरभर में रहा। सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग को परेशानी का सामाना करना पड़ा, क्योंकि ये जरूरत के हिसाब से 10, 20 रुपए का दूध लेकर अपना गुजारा करते हैं। घर तक वितरण व्यवस्था से इन्हें दूध नहीं मिल पाया।
पुलिस को देख दौड़ाई गाड़ी, पकड़ में आए तो हवा निकाली
टोटल लॉकडाउन के दूसरे दिन भी पुलिस और लोगों के बीच आंखमिचौली देखने को मिली। कर्फ्यू के बावजूद लोग घरों से निकलने की फिराक में देखे गए। पुलिस का सायरन सुनकर घर में दौड़कर घुस जाते। गाड़ी के आगे बढ़ते ही फिर दरवाजे पर आ जाते। 60 फीट चौड़ी सड़क पर तो पुलिस ने यहां से गुजरने वालों की गाड़ी की हवा निकाल दी। पुलिस ने पहले उनसे कारण पूछा। आई कार्ड मांगा। संतुष्ट जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की। पुलिस का कहना था कि इतनी समझाइश के बाद भी लोग ऐसे बहाने बना रहे हैं, जिसे सुनकर हंसी भी आती है और गुस्सा भी। लाेग बोलते हैं - दोस्त के यहां जा रहा हूं, बहुत जरूरी काम है। रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल का नाम पूछो तो नहीं बता पाए।
मंगलवार को यह रही स्थिति
- 31 मार्च को सभी बैंकों में क्लोजिंग होने के चलते 11 से शाम 5 बजे तक बैंक खुलेंगे, लेकिन ग्राहकों का काम नहीं होगा।
- रसोई गैस सिलेंडर पहुंचाने के लिए छूट, गैस एजेंसी के ऑफिस खुले, लेकिन ग्राहकों का आना मना।
- हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के भोजन की जिम्मेदारी संचालक और ठेके पर आए श्रमिकों, ठेकेदार, प्रोजेक्ट मैनेजर की, नहीं तो दंडात्मक कार्रवाई।
- जिला प्रशासन ने टिफिन संचालकों को भी टिफिन पहुंचाने की छूट दी।
- एलपीजी बॉटलिंग प्लांट, ऑयल कंपनी और धार, उज्जैन, पीथमपुर, इंदौर, देवास जिले में दवा कंपनियों से जुड़े लोगों को आने-जाने की छूट।
खजराना, चंदन नगर से 400 लोगों को क्वारैंटाइन हाउस भेजा
काेराेना को रोकने के लिए प्रशासन ने शहर में मिले पॉजिटिव मरीजों के करीबी और पड़ाेसियों को क्वारैंटाइन हाउस में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। शहर में 9 मैरिज गार्डन, 3 होटल और एक-एक कॉलेज, होस्टल, धर्मशाला में क्वारैंटाइन हाउस बनाए हैं, जिनमें करीब 400 लाेगाें काे रखा गया है। प्रत्येक अधिकारी को एक संवेदनशील क्षेत्र का प्रभार देते हुए संदिग्धों को चिह्नित कर क्वारैंटाइन हाउस में भेजने के आदेश दिए गए हैं। मंगलवार रात टीम ने चंदन नगर, खजराना और रानीपुरा क्षेत्र से बसों में बैठाकर पुलिस के साथ क्वारैंटाइन हाउस भेजा। खजराना से ले गए लोगों में से करीब 40 को मृदंग गार्डन और 70 से ज्यादा को प्रेसिडेंट हाेटल में रखा है। चंदन नगर के लोगों को दस्तूर और अक्षत गार्डन में रखा है।